बिल्ली और घण्टी के मारा-मारी का मौका नहीं मिला, बिल्ली खुद बोली,
"म्याऊँ-म्याऊँ मैं आऊं मैं आऊं"।रोटी की तरह फ़ूले जा रहे ्सूरज बाबू प्यार
में म्याऊँ-म्याऊँ की आंच पर। तो कह सकते हैं कि पीयार यानि लभ रोटी में
भरे गैस-सा होता है और गैस बने उ ला काफ़ी गूंदना पड़ता है सो हो जाती है
बिल्ली ला_जवाब, शायद्। अरे-रे-रे इत्ती जल्दी जल्दी नहीं, सच बताईये
ला_जवाब हो जाती है कि कर देती है…चलिये आप भी थोड़ा खजूआ लिजिए, क्या ? माथा।
तो साब, रोटी फ़ूलती ही जा रही थी। सूरज बाबू रत_जग्गे के बाद, भरी दुपहरिया में बोलते गुड नाईट तो बिल्ली उनको बताती कि आज नीन्द अच्छी आवेगी…उ देखिए…"तारों के बीच चाँद भी तुम्हे बुला रहा है" ऐसे में, न रुकना था और न रुका, फ़ूलना रोटी का।
तो सूरज बिल्ली की घण्टी पर ऐसे दौड़ते जैसे छूट्टी की घण्टी पर सकूल के विद्यार्थी । तो एक दिन हुआ ई की सूरज बन गए अतिथि…यानी जे का आवे की तिथि न मालूम हो यानी सरप्राइज़ दौरा। गये थे सरप्राइज़ देने खुदे बन गये सरप्राईज़्।
बिल्ली की दो सहेलियां निकली सूरज बाबू की दो पूरानी नाक़ामियाँ। त्…तुम, आप,॥तू? हां॥मैं…निगोड़े। कलमुहे, "तेरी जात की…" …एक का हाथ उनके गिरेबान पर और दूसरे का उनकी पतलून पर्…किसी तरह पतलून का कुछ हिस्सा और कमीज की जेब पीछे छोड़ बाहर आए और साथ लाए गाल पर अँगुलियों के निशान्…कुछ रक्तिम-सिन्दूरी।
साब पीरेम की रोटी तो फ़ूटी मगर साथ फ़ूलाने वाले की अंगुलियां भी झुलसी। दुआ किजिए तो बसइतना की अंगुली की आँच दिल तक न पहुँचे।
तो साब, रोटी फ़ूलती ही जा रही थी। सूरज बाबू रत_जग्गे के बाद, भरी दुपहरिया में बोलते गुड नाईट तो बिल्ली उनको बताती कि आज नीन्द अच्छी आवेगी…उ देखिए…"तारों के बीच चाँद भी तुम्हे बुला रहा है" ऐसे में, न रुकना था और न रुका, फ़ूलना रोटी का।
तो सूरज बिल्ली की घण्टी पर ऐसे दौड़ते जैसे छूट्टी की घण्टी पर सकूल के विद्यार्थी । तो एक दिन हुआ ई की सूरज बन गए अतिथि…यानी जे का आवे की तिथि न मालूम हो यानी सरप्राइज़ दौरा। गये थे सरप्राइज़ देने खुदे बन गये सरप्राईज़्।
बिल्ली की दो सहेलियां निकली सूरज बाबू की दो पूरानी नाक़ामियाँ। त्…तुम, आप,॥तू? हां॥मैं…निगोड़े। कलमुहे, "तेरी जात की…" …एक का हाथ उनके गिरेबान पर और दूसरे का उनकी पतलून पर्…किसी तरह पतलून का कुछ हिस्सा और कमीज की जेब पीछे छोड़ बाहर आए और साथ लाए गाल पर अँगुलियों के निशान्…कुछ रक्तिम-सिन्दूरी।
साब पीरेम की रोटी तो फ़ूटी मगर साथ फ़ूलाने वाले की अंगुलियां भी झुलसी। दुआ किजिए तो बसइतना की अंगुली की आँच दिल तक न पहुँचे।
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