जब दिन बुरे चल रहें हों--
क्या कहते हैं, चढ़े को भी कुत्ता काट खाता है
तो क्या कुत्ता चाँद की छलाँग मार जाता है?
नहीं जी,
हाथी ही जमीन पर लोट जाता है
और सवार ज़मीन सूंघ जाता है
मतलब कुत्ते के अच्छे दिन, समझे कि नहीं
जब दिन अच्छे चल रहें हों--
कुत्ता भले ही चूहे के बिल में घुसा हो
या फिर सूखे नाले में दुबका पड़ा हो
सरेन्डर की मुद्रा में हो,
पाँवों के बीच अपनी पूंछ
छुपाए-दबाए पड़ा हो
आदमी साला छान मारता है
कुत्ते की अम्मा कहाँ तक खैर मनाए
आदमी कुत्ते को नाले तक भी झंझोड़ मारता है
काट खाना ही शाश्वत गुण
शेष अच्छे-बुरे दिन तो -
सब मिथ्या है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें