शुक्रवार, 8 मार्च 2024

छवि

 तुम वो नहीं, जो तुमने कही
मेरे लिए तो कतई नहीं
जो तुमने कही;
मैं भी वो नहीं, जो भी कही
औरों के लिए तो जरा भी नहीं
जो भी मैंने कही।

हम मूर्तिपूजक हैं
हमने पूजा है 
एक-दूसरे की प्रतिमा को
जो हमने एक-दूसरे की तराशी है।

एक-दूजे के कर्म मिट्टी को ढाला है
अपने विचारों के साँचे में
हमारे व्यक्तिगत अनुभवों ने रंगा है
दिया है रंग एक-दूसरे के किये को
जो ज़ुदा, अलग-अनोखा है।

हमने नहीं की
हमारे छवियों ने की 
बातें,
अगर की, जब भी की।


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